आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने गुरुवार को इमाम महदी अलैहिस्सलाम के शुभ जन्मदिवस के उपलक्ष्य में टीवी व सोशल मीडिया से सीधे प्रसारित होने वाले अपने भाषण में ईरानी राष्ट्र व संसार के सभी स्वतंत्रता प्रेमियों को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञान, बुद्धि व अनुभव ईश्वर की बड़ी अनुकंपाएं हैं और ये बहुत सी समस्याओं का समाधान करती हैं लेकिन अब तक यही सिद्ध हुआ है कि ये चीज़ें अन्याय की बड़ी समस्या का समाधान नहीं कर सकतीं और मनुष्य की इस सर्वकालिक अभिलाषा के पूरा होने में ईश्वर की सहायता की ज़रूरत है और यही कारण है कि इमाम महदी का बड़ा दायित्व ज़मीन को न्याय से भर देना है।
उन्होंने पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न होने वाली स्थिति की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि यह विषय सभी के लिए और राष्ट्रों व सरकारों के लिए एक विचित्र परीक्षा है और लोगों को इससे निराश नहीं होना चाहिए बल्कि शांति बनाए रखना चाहिए और जानना चाहिए कि निश्चित रूप से यह स्थिति बदल जाएगी। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कोरोना के मामले में पश्चिमी दुनिया के व्यवहार और अमरीका व कुछ यूरोपीय देशों की ओर से मास्क व ग्लव्ज़ चुराए जाने, दुकानों पर लोगों के हमले, ट्वायलेट पेपर के लिए लोगों के झगड़े, हथियार ख़रीदने के लिए लोगों की लम्बी लाइनों, वृद्धों का उपचार न किए जाने और कोरोना के डर से लोगों की आत्महत्या की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि इस मामले में पश्चिम की संस्कृति व सभ्यता की क़लई खुल गई और यह पश्चिमी सभ्यता पर राज करने वाले नास्तिक व व्यक्तिवादी विचार का स्वाभाविक परिणाम है।
आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने पहले व दूसरे विश्व युद्ध, वियेतनाम के युद्ध और अफ़ग़ानिस्तान व इराक़ पर अमरीका के हमले को पिछले बरसों की अहम व बड़ी घटनाएं बताते हुए कहा कि कोरोना का मामला फ़िलिस्तीन व यमन समेत विभिन्न राष्ट्रों पर संसार की बड़ी शक्तियों के अत्याचारों से निश्चेतना का कारण नहीं बनना चाहिए और इसी तरह साम्राज्य की चालों व दुश्मनी से भी निश्चेत नहीं रहना चाहिए क्योंकि कुछ लोगों के विचार के विपरीत, जो यह कहते हैं कि अगर हम दुश्मनी नहीं करेंगे तो वे भी दुश्मनी नहीं करेंगे, साम्राज्य की मूल दुश्मनी इस्लामी व्यवस्था और धार्मिक प्रजातंत्र के सिद्धांत से है।